Sunday, 23 March 2025

रामपुर कोतवाली में तैनात सिपाही ने खुद को मारी गोली सरकारी आवास में हुई वारदात, मची अफरा-तफरी


 रामपुर कोतवाली में तैनात सिपाही ने खुद को मारी गोली



सरकारी आवास में हुई वारदात, मची अफरा-तफरी



उत्तर प्रदेश, रामपुर की टांडा कोतवाली में तैनात सिपाही अंकित ने अपने सरकारी आवास पर खुद को गोली मार ली। अचानक हुई इस घटना से पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। गोली की आवाज सुनते ही थाने में मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत उसके आवास पर पहुंचे। गंभीर हालत में सिपाही को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अतुल कुमार श्रीवास्तव और क्षेत्राधिकारी (सीओ) कीर्ति निधि आनंद मौके पर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर सिपाही की हालत का जायजा लेते हुए पूरे मामले की जानकारी ली।


 सिपाही के खुद को गोली मारने की घटना के बाद पूरे थाने में अफरा-तफरी मच गई। साथी पुलिसकर्मियों का कहना है कि अंकित पिछले कुछ दिनों से तनाव में लग रहा था, लेकिन उसने किसी से कोई परेशानी साझा नहीं की थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिपाही की व्यक्तिगत या ड्यूटी से जुड़ी किसी परेशानी के चलते यह कदम उठाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने सिपाही के परिजनों को सूचना दे दी है और वह अस्पताल के लिए रवाना हो चुके हैं।

आजमगढ़ महराजगंज एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगते ही मरीज की बिगड़ी हालत, हुई मौत परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में दी तहरीर अस्पताल के सामने शव रखकर किया विरोध-प्रदर्शन


 आजमगढ़ महराजगंज एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगते ही मरीज की बिगड़ी हालत, हुई मौत



परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में दी तहरीर


अस्पताल के सामने शव रखकर किया विरोध-प्रदर्शन



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के महराजगंज थाना क्षेत्र के जूड़ाखुर्द में स्थित एक निजी अस्पताल में आपरेशन से पहले चिकित्सक ने मरीज को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया तो उसकी हालत बिगड़ गई। चिकित्सक ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है और अस्पताल के सामने शव रखकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस परिजनों को समझाने में जुटी रही।


महाराजगंज थाना क्षेत्र के नरायनपुर गांव निवासी प्रेमनाथ यादव ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि 20 मार्च को दोपहर करीब 12 बजे जूड़ाखुर्द स्थित एक निजी अस्पताल में अपनी पत्नी मनीषा यादव (32) के बच्चेदानी का आपरेशन कराने के लिए भर्ती कराया था। पति प्रेमनाथ का आरोप है कि आपरेशन से पूर्व चिकित्सक ने जैसे ही एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया वैसे ही मनीषा की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद चिकित्सक ने स्वायं अपनी गाड़ी से शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।


मनीषा का उपचार चल रहा था कि रविवार को दिन में करीब 10 बजे उसकी मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है और अस्पताल के सामने शव रखकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्होंने शव को अस्पताल के सामने रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। साथ ही, स्थानीय थाने में चिकित्सक के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजन दोषी चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है। मृतका मनीषा एक पुत्र व दो पुत्री की मां थी।


थानाध्यक्ष महाराजगंज विनय कुमार मिश्रा ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत मिली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आजमगढ़ सही समय बताने लगी घंटाघर की चारों घड़ियां नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर ने पूरा किया अपना वादा


 आजमगढ़ सही समय बताने लगी घंटाघर की चारों घड़ियां



नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर ने पूरा किया अपना वादा


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के सिविल लाइन चौराहे पर बने घंटाघर पर लगी घड़ियां अब सही समय बताना शुरू कर दी है। करीब एक माह पूर्व एक भेंट में नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम उर्फ मंसूर ने इस बात का जिक्र किया था कि सिविल लाइन चौराहे पर बने घंटाघर पर घड़ियां सही समय बतायेंगी। घण्टाघर का जीर्णोद्धार भी किया जायेगा। आज घंटाघर पर चार घड़ियां सही समय बताती हुईं नजर आ रही हैं।


बताते चलें कि आजमगढ़ के निवर्तमान जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने अपने कार्यकाल के दौरान नगर के चौराहों का सुन्दरीकरण का कार्य करवाते समय सिविल लाइन चौराहे को घंटाघर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी नगर पालिका को सौंपी गई। घंटाघर बनाने के लिए 2016 में लगभग दस लाख रूपये लागत निर्धारित हुई। एक ठेकेदार को इसके निर्माण की जिम्मेदारी मिली।


 ठेकेदार ने कार्य शुरू किया लेकिन कार्य को पूरा किए ही ठेकेदार गायब हो गया। अलबत्ता नीचे की फिनिशिंग का कार्य पूरा किए बगैर ठेकेदार ने यहां चारों दिशाओं में चार घड़ियां लगा दी। इसके बाद नगर पालिका में सत्ता परिवर्तन हो गया और ठेकेदार भी अधूरा कार्य छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद एक नई चीज घंटाघर में देखने को यह मिली कि घंटाघर में लगी चारों घड़ियां चार समय बताने लगी। इसको लेकर लोगों में उस समय काफी आक्रोश भी था। पुन: जब नगर पालिका में सत्ता परिवर्तन हुआ और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सरफराज आलम उर्फ मंसूर नगर पालिका के चेयरमैन चुने गये।


अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही सरफराज आलम उर्फ मंसूर ने यह बात कही थी कि उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि आजमगढ़ नगर पालिका को सुन्दर और स्वच्छ बनाया जाय। जिसके क्रम में नगर पालिका अध्यक्ष सरफराज आलम उर्फ मंसूर द्वारा कई विकास कार्य कराये गये, अभी हाल ही में नरौली और सिधारी पुल पर नगर पालिका सुनहरी लाइटें लगवाई गयी। इसके बाद घंटाघर की चारों दिशाओं में लगी चार घड़ियों का जीर्णाद्धार करवाकर राहगीरों को समय देखने का बड़ा और सुगम माध्यम दे दिया।