आजमगढ़ जहानागंज धरती मां की गोद में समाया देश का लाल
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, देखकर नम हुईं आंखें, शौर्य यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के जहानागंज विकासखंड के सुहवल गांव निवासी सूबेदार प्रेम शंकर चतुवेर्दी पुत्र रमाकांत चतुवेर्दी देश सेवा करते हुए शहीद हो गए। वे भारतीय सेना में सूबेदार पद पर तैनात थे और वर्तमान में सिकंदराबाद में ड्यूटी पर कार्यरत थे। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद सेना द्वारा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद सूबेदार का पार्थिव शरीर जब सेना के जवानों के काफिले के साथ दो सैन्य वाहनों में उनके पैतृक गांव सुहवल पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई। भारत माता की जय, वंदे मातरम् और शहीद अमर रहें के नारों से पूरा गांव और क्षेत्र गूंज उठा। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे गांव से शौर्य यात्रा निकाली गई, जो सुहवल बाजार होते हुए गुजरी। हाथों में तिरंगा लिए लोग पैदल और बाइक से यात्रा में शामिल हुए। देशभक्ति गीतों के बीच पूरा बाजार बंद रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए जहानागंज थाना पुलिस मुस्तैद रही।
शहीद सूबेदार प्रेम शंकर चतुवेर्दी का अंतिम संस्कार गाजीपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने सलामी दी और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अग्नि दी गई। वे चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे और अपने पीछे तीन पुत्र व एक पुत्री छोड़ गए हैं। खास बात यह है कि उनके दूसरे पुत्र रिशु चतुवेर्दी का कुछ दिन पहले ही भारतीय वायुसेना में चयन हुआ था। बेटे की सफलता की खुशी अभी पूरी तरह आई भी नहीं थी कि पिता के शहीद होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शहीद की शहादत पर पूरा क्षेत्र गर्व और शोक से भर गया है। लोग उन्हें कर्तव्यनिष्ठ, साहसी और देशभक्त सैनिक के रूप में याद कर रहे हैं। आजमगढ़ की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह वीरों की धरती है। शहीद सूबेदार प्रेम शंकर चतुवेर्दी अमर रहें। भारत माता की जय।






