लखनऊ, लापरवाही पर सीएम योगी का चला डंडा, 12 इंजीनियर निलंबित
7 का तबादला, 7 अन्य के खिलाफ कारण बताओ सहित अन्य नोटिस
नल से जल परियोजना में लापरवाही पर हुई बड़ी कार्रवाई
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हर ग्रामीण घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर चल रही जल जीवन मिशन परियोजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने 26 इंजीनियरों पर कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कार्यों में देरी और लापरवाही के आरोप में 12 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा 4 अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि 3 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं, 7 इंजीनियरों का तबादला भी किया गया है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में लखीमपुर खीरी के अविनाश गुप्ता, जौनपुर के सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के मो. कासिम हाशमी, चंदौली के अमित राजपूत, सीताराम यादव, बिजनौर के अकबर हसन, औरैया के अनुराग गोयल, हाथरस के कुलदीप कुमार सिंह, आजमगढ़ के राजेन्द्र कुमार यादव, बरेली के रूप चंद्र, बाराबंकी के अवनीश प्रताप सिंह और कुशीनगर के धर्मप्रकाश महेश्वरी शामिल हैं। औरैया के अमन यादव, मैनपुरी के अंकित यादव, प्रयागराज के प्रवीण कुट्टी और शामली के फूल सिंह यादव के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। गाजियाबाद के भारत भूषण, आगरा के अमित कुमार और मिर्जापुर के राजेश कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
विभाग ने विभिन्न जिलों में तैनात सात इंजीनियरों का स्थानांतरण भी किया है, जिनमें विपिन कुमार वर्मा, मो. असजद, प्रदीप कुमार मिश्रा, उदयराज गुप्ता, अमित कुमार, चन्द्र बोध त्यागी और अजय कुमार शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि सरकार जल जीवन मिशन को मिशन मोड में चला रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्यशैली में सुधार न होने पर बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रदेश सरकार ने दोहराया है कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।






