आजमगढ़ अहरौला पूजा के विवाद में 5 मौतें... क्या शंभूपुर गोलीकांड के पीछे है यह एंगल?
पंडितों से आधार कार्ड मांगने से लेकर मासूम को भी गोली मारने जैसा कदम....संकेत क्या?
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद देर रात ऐसी खूनी वारदात में बदल गया, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। पत्नी बबीता और पूजा कराने आए दो पंडितों की गोली मारकर हत्या के बाद अरविंद सिंह बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया। पुलिस के अनुसार, कमरे से बाहर निकालने के प्रयास के दौरान उसने अपने एक बच्चे को भी गोली मार दी। बच्चे की सुरक्षा के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें अरविंद घायल हो गया। अस्पताल में उपचार के दौरान आरोपी और घायल बच्चे की भी मौत हो गई। इस तरह घटना में कुल पांच लोगों की जान चली गई। इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे की असली वजह अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है। प्रारंभिक तौर पर पूजा को लेकर विवाद और पंडितों से कहासुनी की बात सामने आई है। हालांकि, घटना की परिस्थितियां सामने आने के बाद पुलिस के लिए पारिवारिक और वैवाहिक विवाद समेत ऑनर किलिंग के संभावित एंगल की जांच भी अहम हो गई है। फिलहाल पुलिस ने ऑनर किलिंग की पुष्टि नहीं की है और इस पहलू पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम अरविंद बाजार से घर पहुंचा तो वहां पूजा चल रही थी। पूजा कराने के लिए पंडित मौजूद थे। घर में उसकी पत्नी बबीता और बच्चे भी थे। पूजा देखकर अरविंद ने पंडितों से जानकारी ली और उनसे आधार कार्ड मांगने लगा। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। कहासुनी बढ़ने के बाद आरोप है कि अरविंद ने घर में रखे हथियार से फायरिंग कर दी। फायरिंग में उसकी पत्नी बबीता और दो पंडित गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में तीनों की मौत हो गई। मृतकों में पंडित महेंद्र पाठक और एक अन्य पंडित के शामिल होने की प्रारंभिक जानकारी सामने आई है। घटना के दौरान राइफल से भी फायरिंग किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन हथियारों और गोलियों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। तीन हत्याओं के बाद अरविंद बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया।
सूचना पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि कमरे में मौजूद बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना भी थी। पुलिस टीम ने आरोपी को समझाने और आत्मसमर्पण के लिए बाहर आने को कहा। पुलिस के अनुसार, काफी प्रयास के बावजूद अरविंद बाहर नहीं आया और उसने अपने एक मासूम बच्चे को गोली मार दी। बच्चे की जान खतरे में देख पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान अरविंद गोली लगने से घायल हो गया। आरोपी और घायल बच्चे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सकुशल बाहर निकाल लिया। घटना के बाद अब जांच का दायरा केवल पूजा के दौरान हुए विवाद तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अरविंद और उसकी पत्नी के बीच पहले से कोई पारिवारिक या वैवाहिक विवाद था या नहीं। घटना से पहले घर में क्या परिस्थितियां थीं, पूजा किस उद्देश्य से कराई जा रही थी, पंडितों को किसने बुलाया था और अरविंद के पंडितों से आधार कार्ड मांगने के पीछे क्या वजह थी—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। ऑनर किलिंग का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है कि पहली फायरिंग में अरविंद की पत्नी समेत पूजा कराने आए लोगों को निशाना बनाया गया। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हत्या का कारण सम्मान या पारिवारिक प्रतिष्ठा से जुड़ा कोई विवाद था। इस एंगल की पुष्टि के लिए पुलिस को परिवार के रिश्तों, पुराने विवादों, मोबाइल फोन, बातचीत और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसओजी और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल को सुरक्षित कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मौके से हथियार और फायरिंग से जुड़े अन्य साक्ष्य संकलित किए हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और पुलिस की पूछताछ से यह स्पष्ट होगा कि शंभूपुर की इस खूनी वारदात की असली वजह क्या थी। पूजा के विवाद से शुरू हुई घटना के पीछे कहीं कोई पुराना पारिवारिक राज तो नहीं था—यह सवाल फिलहाल जांच के केंद्र में है।
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