Sunday, 31 May 2026

लखनऊ राजीव कृष्ण बने उत्तर प्रदेश के पूर्णकालिक डीजीपी 4 साल बाद प्रदेश को मिला स्थायी पुलिस प्रमुख, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी मंजूरी 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण संभालेंगे प्रदेश पुलिस की कमान

लखनऊ राजीव कृष्ण बने उत्तर प्रदेश के पूर्णकालिक डीजीपी



4 साल बाद प्रदेश को मिला स्थायी पुलिस प्रमुख, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी मंजूरी


1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण संभालेंगे प्रदेश पुलिस की कमान



लखनऊ, उत्तर प्रदेश को करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपना पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को प्रदेश का स्थायी पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद इस संबंध में शासन ने आदेश जारी कर दिया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा 26 मई को हुई बैठक के बाद प्रदेश सरकार को भेजे गए पैनल में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा तथा 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नाम शामिल थे। इनमें राजीव कृष्ण का नाम सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।


 राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण पुलिस महकमे में अपने लंबे प्रशासनिक और मैदानी अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में जिम्मेदारियां निभाई हैं तथा पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 


सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार स्थायी डीजीपी का कार्यकाल न्यूनतम दो वर्ष का होता है। ऐसे में राजीव कृष्ण वर्ष 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। वर्ष 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का इंतजार किया जा रहा था। अपने तीन दशक से अधिक लंबे पुलिस सेवा काल में राजीव कृष्ण ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले वे डीजी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रहे थे। उनकी पहचान एक कर्मठ, अनुभवी और प्रभावी अधिकारी के रूप में रही है। राजीव कृष्ण लखनऊ, मथुरा, इटावा, आगरा और नोएडा समेत कई जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके हैं। इटावा में तैनाती के दौरान उन्होंने दस्यु गिरोहों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया था। इसके अलावा वे लखनऊ जोन के एडीजी तथा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में आईजी आॅपरेशन के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। शासन और पुलिस महकमे में उनकी गिनती भरोसेमंद एवं अनुभवी अधिकारियों में की जाती है।

 

आजमगढ़ जीयनपुर फर्जी जमानत गिरोह का सक्रिय सदस्य मैकू यादव गिरफ्तार, कूटरचित दस्तावेजों से कराता था अभियुक्तों की जमानत हत्या, लूट, डकैती समेत गंभीर मामलों के आरोपियों को दिलाता था राहत, आरोपी पर दर्ज हैं 25 मुकदमे


 आजमगढ़ जीयनपुर फर्जी जमानत गिरोह का सक्रिय सदस्य मैकू यादव गिरफ्तार, कूटरचित दस्तावेजों से कराता था अभियुक्तों की जमानत



हत्या, लूट, डकैती समेत गंभीर मामलों के आरोपियों को दिलाता था राहत, आरोपी पर दर्ज हैं 25 मुकदमे


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में फर्जी जमानत प्रकरण में वांछित चल रहे एक शातिर अभियुक्त को जीयनपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी कूटरचित अभिलेखों के माध्यम से गंभीर अपराधों में बंद अभियुक्तों की जमानत कराने वाले संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। मामले में 30 मई 2026 को कचहरी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक चन्द्र प्रकाश कश्यप ने थाना कोतवाली नगर में तहरीर देकर बताया था कि कुछ तथाकथित वकील एवं जमानतदार आर्थिक लाभ के लिए हत्या, डकैती, लूट, चोरी, गैंगस्टर एक्ट तथा अवैध शस्त्र अधिनियम जैसे गंभीर मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध अभियुक्तों की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत करा रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि एक ही जमानतदार द्वारा समान दस्तावेजों का प्रयोग कर कई अभियुक्तों की जमानत कराई गई, जिससे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की पुष्टि हुई। तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 267/2026 के तहत विभिन्न धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया।


 वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) एवं क्षेत्राधिकारी सगड़ी के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त रामचन्द्र यादव उर्फ मैकू यादव उर्फ सत्यम यादव निवासी भरौली थाना जीयनपुर को गोरखपुर जिला कारागार के समीप से गिरफ्तार कर लिया। 


पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके विरुद्ध आजमगढ़, मऊ, जौनपुर और वाराणसी सहित विभिन्न जनपदों में चोरी, लूट, डकैती, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, शस्त्र अधिनियम और धोखाधड़ी से संबंधित कुल 25 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है तथा फर्जी जमानत गिरोह में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने और अपराधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

प्रयागराज महिला दरोगा का आरोप, ससुर ने किया मेरा रेप थाने में 2 घंटे तक चला धरना-प्रदर्शन, केस दर्ज, विभागीय जांच भी शुरू


 प्रयागराज महिला दरोगा का आरोप, ससुर ने किया मेरा रेप



थाने में 2 घंटे तक चला धरना-प्रदर्शन, केस दर्ज, विभागीय जांच भी शुरू


उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में तैनात एक महिला दरोगा ने अपने रिटायर्ड दरोगा ससुर पर दुष्कर्म और प्रॉपर्टी डीलर पति पर फायरिंग का गंभीर आरोप लगाते हुए पारा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। महिला ने अन्य ससुरालीजनों पर भी उत्पीड़न और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मामले में कार्रवाई न होने से नाराज महिला दरोगा ने किसान यूनियन के नेताओं और परिजनों के साथ थाने में करीब दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया।


 पीड़िता के अनुसार उसने करीब एक वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद उसका चयन पुलिस विभाग में दरोगा पद पर हो गया। महिला का आरोप है कि विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग जातिसूचक टिप्पणियां करते हुए उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे। पति से शिकायत करने के बावजूद उसे कोई सहयोग नहीं मिला। महिला का आरोप है कि नौकरी करने को लेकर भी उसे अपमानित किया जाता था। इसी दौरान उसके रिटायर्ड दरोगा ससुर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे चूहे मारने की दवा खिलाकर जान से मारने की कोशिश की गई और कमरे में बंद कर दिया गया। किसी तरह उसने अपने पिता को सूचना दी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि जब उसके पिता शिकायत लेकर ससुराल पहुंचे तो पति और ससुर ने उन पर हमला कर असलहा तानकर भगा दिया। महिला का कहना है कि चार दिन पहले भी पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुरुवार को महिला दरोगा अपने परिजनों और किसान यूनियन कार्यकर्ताओं के साथ पारा थाने पहुंची और धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेसुध हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पारा थाना प्रभारी सुरेश सिंह ने बताया कि मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है और दोनों पक्षों की तहरीर पर केस दर्ज कर जांच की जा रही है। वहीं, थाने में प्रदर्शन करने के मामले में महिला दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। प्रयागराज पुलिस के अधिकारी पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं।

Saturday, 30 May 2026

आजमगढ़ 1.24 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को 7 वर्ष की सजा, 91 लाख रुपये का जुर्माना 16 वर्ष पुराने मामले में कोर्ट का फैसला, आपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी से मिली दोषसिद्धि


 आजमगढ़ 1.24 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को 7 वर्ष की सजा, 91 लाख रुपये का जुर्माना


16 वर्ष पुराने मामले में कोर्ट का फैसला, आपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी से मिली दोषसिद्धि



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद पुलिस द्वारा चलाए जा रहे "आपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की सतत निगरानी तथा अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास और 91 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला थाना फूलपुर क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 7 दिसंबर 2010 को वादी इमरान अहमद पुत्र इस्तयाक अहमद निवासी टेहुआ, थाना फूलपुर ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि गम्भीरवन निवासी सुबाष चौबे पुत्र रामनयन चौबे ने छल-कपट, कूटरचना और धोखाधड़ी के माध्यम से उनसे 1 करोड़ 24 लाख रुपये प्राप्त कर लिए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई। तहरीर के आधार पर थाना फूलपुर में आरोपी के विरुद्ध मुकदमा संख्या 1255/2010 धारा 419, 420, 467, 468, 471, 504 एवं 506 भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज किया गया। 


विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलित कर आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। शनिवार को कोर्ट नम्बर 11 जनपद आजमगढ़ ने मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी सुबाष चौबे को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा तथा 91 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय के इस निर्णय को आॅपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत पुलिस और अभियोजन की संयुक्त कार्रवाई की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जनपद में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित एवं प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई लगातार जारी है, जिससे अपराधियों में कानून का भय और आमजन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हो सके।

आजमगढ़ 3 ग्राम प्रधान नहीं बन सके प्रशासक 3 सदस्यीय समितियां बनने के बाद भी नहीं शुरू हुआ खातों का संचालन


 आजमगढ़ 3 ग्राम प्रधान नहीं बन सके प्रशासक


3 सदस्यीय समितियां बनने के बाद भी नहीं शुरू हुआ खातों का संचालन


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की तीन ग्राम पंचायतों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज होने के कारण संबंधित ग्राम प्रधान प्रशासक का कार्यभार नहीं संभाल सके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और कई महत्वपूर्ण योजनाएं पिछले कई महीनों से ठप पड़ी हैं। 


जानकारी के अनुसार रानी की सराय विकास खंड के मैनपारपुर, मिर्जापुर ब्लॉक के दमदियावन तथा सठियांव ब्लॉक के सोनपार ग्राम पंचायतों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच कराई गई थी। जांच के बाद संबंधित ग्राम प्रधानों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन किसी भी प्रधान ने निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई। बावजूद इसके कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर अंतिम चेतावनी जारी की गई, लेकिन तब भी प्रधानों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जिलाधिकारी के अनुमोदन पर विभाग ने शिकायतों को सही मानते हुए तीनों ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए। गांवों में विकास कार्यों को जारी रखने के उद्देश्य से तीन सदस्यीय समितियों का गठन किया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि समिति गठन के बाद विकास योजनाएं दोबारा गति पकड़ेंगी, लेकिन अब तक पंचायत खातों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग समेत अन्य विकास कार्य प्रभावित हैं। साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। उधर, 26 मई 2026 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत चुनाव न होने की स्थिति में शासन ने सभी ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की अनुमति प्रदान की थी। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय से आवश्यक आदेश भी जारी किए गए, लेकिन जिन ग्राम प्रधानों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार पहले से सीज हैं, वे प्रशासक का दायित्व नहीं संभाल सके। परिणामस्वरूप संबंधित ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

आजमगढ़ महाराजगंज, पत्नी के हत्यारे को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा शादी के 6 महीने बाद ही पत्नी की हत्या कर घर में दफना दिया था शव 3 साल से जूझ रहा था गंभीर बीमारी से, पुलिसकर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार


 आजमगढ़ महाराजगंज, पत्नी के हत्यारे को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा


शादी के 6 महीने बाद ही पत्नी की हत्या कर घर में दफना दिया था शव

3 साल से जूझ रहा था गंभीर बीमारी से, पुलिसकर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के महाराजगंज थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जहां पत्नी की हत्या के मुकदमे में जेल में बंद एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार में कोई सदस्य मौजूद न होने पर पुलिस कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए स्वयं उसका अंतिम संस्कार कराया। 


जानकारी के अनुसार महाराजगंज थाना क्षेत्र निवासी सूरज गौड़ (25) पुत्र गुलाब गौड़ की वर्ष 2023 में अनीता से शादी हुई थी। शादी के करीब छह माह बाद अनीता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप था कि उसकी हत्या कर शव को घर के कमरे में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर सूरज गौड़ तथा उसके परिजनों के खिलाफ दहेज हत्या और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने सूरज और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। 


बताया जा रहा है कि सूरज गौड़ पिछले लगभग तीन वर्षों से गंभीर टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित था। बीमारी के चलते उसके फेफड़े बुरी तरह संक्रमित हो चुके थे। पहले उसका इलाज जेल अस्पताल में कराया गया, बाद में हालत बिगड़ने पर उसे वाराणसी में भी उपचार के लिए भेजा गया। पिछले करीब चार माह से वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। सूरज की मां का पहले ही निधन हो चुका था, जबकि उसके पिता अभी भी जेल में बंद हैं। परिवार में कोई भाई-बहन भी नहीं है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन आगे नहीं आया। परिजनों के अभाव में पुलिस कर्मियों ने स्वयं अंतिम संस्कार की व्यवस्था कर युवक का दाह संस्कार कराया। पुलिस के इस मानवीय कदम की क्षेत्र में चर्चा हो रही है।

Thursday, 28 May 2026

आजमगढ़ सिधारी, कितने रुपए में हुआ था मासूम का सौदा ? बच्चा बदले जाने की खबरों के बीच चर्चा में आया रेनबो हॉस्पिटल आधी रात को वापस मिला दंपति को अपना बच्चा


 आजमगढ़ सिधारी, कितने रुपए में हुआ था मासूम का सौदा ?



बच्चा बदले जाने की खबरों के बीच चर्चा में आया रेनबो हॉस्पिटल


आधी रात को वापस मिला दंपति को अपना बच्चा



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में नवजात को बदले जाने को लेकर उठे विवाद ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। रेनबो हॉस्पिटल में भर्ती बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनका बेटा बदलकर बच्ची दे दी गई। मामले ने तूल तब पकड़ा जब अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया और “मासूम के सौदे” की चर्चाएं होने लगीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर जांच शुरू की, जिसके बाद दंपति को उनका नवजात बच्चा वापस मिला। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि सिधारी थाना क्षेत्र में स्थित रेनबो हॉस्पिटल में नवजात को बदले जाने के बाद जमकर हंगामा किया गया। शहर कोतवाली के आसिफगंज निवासी कमलेश वर्मा के अनुसार उनकी ससुराल बलिया जिले में है, 12 मई को बलिया जिले के महिला अस्पताल में उनकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया था। नवजात की हालत बिगड़ने लगी, जिसके चलते 12 मई की शाम नवजात को आज़मगढ़ के रेनबो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नवजात को अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में उपचार के लिए रखा गया था। परिजनों का आरोप है कि 27 मई दिन बुधवार को जब बच्चे को एनआईसीसीयू वार्ड से बाहर निकाला गया और उसकी मां को दिखाया गया, तब उन्हें पता चला कि बच्चा की जगह बच्ची है। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया, परिजन पैसों के लेनदेन के बाद बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए हंगामे पर उतर आए। इस दौरान अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। 


बताया जा रहा है कि इसके बाद रेनबो अस्पताल के मैनेजर शशि पांडेय तथा बच्चे के पिता कमलेश वर्मा सहित तीन लोग बुधवार की रात को ही कंचनपुर, रासेपुर बोंगरिया गांव जाकर बच्चे को वापस लाये। इस बावत आजमगढ़ पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण भी दिया गया कि दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, अब स्थिति सामान्य है। अब इसके बाद शुरू हुआ जो किसी बड़े शर्मनाक घटनाक्रम से कम नहीं है। जिस पिता द्वारा अपने बच्चे को बदले जाने को बात कही जा रही थी, अब उसके द्वारा दुबारा बयान दिया गया कि अस्पताल में ऐसी कोई घटना उसके साथ नहीं हुई। वहीं आजमगढ़ पुलिस द्वारा इस मामले में साफ शब्दों में बताया गया है कि दोनों परिजनों को उनके बच्चे सौंप दिए गए हैं। वहीं इस मामले में एक धड़ा खुलकर अस्पताल प्रशासन के समर्थन में आ गया और इतनी बड़ी घटना को अफवाह करार दे दिया। अगर घटना अफवाह है तो हंगामा हुआ क्यों ? अब सही कौन है, गुम हुए बच्चे के पिता का पहला बयान जिसमें बच्चे को बदले जाने की बात कही गई है, या फिर बच्चा मिलने के बाद दूसरे दिन दिया गया बयान कि बच्चा नहीं खोया था, या फिर आज़मगढ़ पुलिस द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण कि दोनों परिजनों को उनके बच्चे सौंप दिए गए हैं, या फिर वह एकतरफा बात करने वाला वह धड़ा जिसने पूरे घटनाक्रम को ही अफवाह करार दे दिया, यह एक बड़ा रहस्य है। (आपको बता दें कि इस घटनाक्रम में एक बड़ा सच एक दिन बाद कल की खबर में दिये जाने का प्रयास किया जाएगा, जो इस घटना के हर रहस्य से पर्दा हटा देगा)।